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1## [OTT और सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट बैन करने की मांग पर SC ने केंद्र से मांगा जवाब](https://www.aajtak.in/legal-news/story/supreme-court-ott-social-media-obscene-content-ban-plea-delhi-lclar-dskc-2227501-2025-04-28)
1## [प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद केस में जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियों में गौर करने लायक हैं ये बातें](https://www.aajtak.in/india/news/story/justice-surya-kant-comment-on-ashoka-university-professor-ali-khan-mahmudabad-case-supreme-court-judge-ntcppl-dskc-2246189-2025-05-22)
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3##### 28 अप्रैल 2025
3##### 22 मई 2025
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5सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को OTT और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है. कोर्ट ने इसे एक गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि यह मसला विधायिका और कार्यपालिका के क्षेत्र में आता है, केंद्र ने संतुलित कदम उठाने का भरोसा दिया है.
5अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद केस में जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय संवेदनशीलता के बीच एक संतुलन की जरूरत पर बल देती है. जस्टिस सूर्यकांत के कमेंट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में राष्ट्र के एक जिम्मेदार शख्स को उसकी नागरिक बोध वाली जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करते हैं.
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7## [क्या सुप्रीम कोर्ट, CJI या जजों पर टिप्पणी करना अपराध है? जानें- क्या कहता है कानून](https://www.aajtak.in/india/news/story/supreme-court-contempt-bjp-mp-nishikant-dubey-parliament-versus-judiciary-waqf-act-direction-to-president-ntcppl-dskc-2221981-2025-04-21)
7## ['हम भारतीय हैं, हमारे कर्मचारी भी...', हाईकोर्ट में तुर्की से जुड़ी Celebi एविएशन की दलील](https://www.aajtak.in/legal-news/story/turkey-linked-celebi-aviation-tells-court-we-are-indian-employees-are-indians-ntc-rpti-2245731-2025-05-21)
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9##### 21 अप्रैल 2025
9##### 21 मई 2025
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11सरल शब्दों में कहें तो सुप्रीम कोर्ट, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), या अन्य जजों पर टिप्पणी करना अपने आप में अपराध नहीं है. संतुलित, तथ्यपरक और सम्मानजनक आलोचना अपराध की श्रेणी में नहीं आती हैं. अब देखना होगा कि समय आने पर निशिकांत दुबे के बयान की कोर्ट व्याख्या कैसे करता है. किन संदर्भों में करता है. इसे न्यायपालिका पर अनर्गल टिप्पणी मानता है अथवा सहज प्रतिक्रिया.
11सेलेबी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, क्योंकि इस फैसले के कारण कंपनी के एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सेलेबी पिछले 17 वर्षों से बिना किसी दाग के काम कर रही है. उन्होंने अदालत को बताया कि सेलेबी एक भारतीय कंपनी है, और इसके 10,000 कर्मचारी भारतीय हैं.
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13## [क्या वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट आज लगा देगा स्टे? ये 3 सवाल तय करेंगे](https://www.aajtak.in/india/news/story/waqf-amendment-act-hearing-in-supreme-court-supreme-court-waqf-by-user-provision-non-muslims-on-waqf-board-ntcppl-dskc-2218908-2025-04-17)
13## [घरेलू हिंसा मामलों में बाल कल्याण अधिकारियों की भूमिका नहीं, संरक्षण अधिकारी नियुक्त करें: SC](https://www.aajtak.in/legal-news/story/child-welfare-officers-cant-take-up-domestic-violence-cases-ensure-protection-officers-says-sc-ntc-rptc-2245086-2025-05-20)
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15##### 17 अप्रैल 2025
15##### 20 मई 2025
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17वक्फ संशोधन कानून 2025 पर बुधवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि "हम आम तौर पर इस चरण में किसी कानून पर रोक नहीं लगाते हैं, जब तक कि असाधारण परिस्थितियां न हों. यह एक अपवाद प्रतीत होता है. हमारी चिंता यह है कि अगर वक्फ-बाय-यूजर को गैर-अधिसूचित किया जाता है, तो इसके बहुत बड़े परिणाम हो सकते हैं.
17सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईसीडीएस (ICDS) या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जो बाल विकास योजनाओं के तहत कार्यरत हैं, घरेलू हिंसा कानून के तहत नियुक्त संरक्षण अधिकारी नहीं हो सकते. कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों पर पहले से ही बाल कल्याण, पोषण, निगरानी और अन्य योजनाओं की भारी जिम्मेदारी है, और घरेलू हिंसा के मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए अलग से समर्पित अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है.
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19## [वक्फ एक्ट लीगल या इलीगल? SC में आज सुनवाई, क्या हैं मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें](https://www.aajtak.in/india/news/story/waqf-amendment-act-hearing-in-supreme-court-muslim-organisation-oppse-hindu-side-state-govt-ntcppl-dskc-2217886-2025-04-16)
19## [झूठे केस में फंसाने वाले वकील को 10 साल से ज्यादा की सजा... लखनऊ की कोर्ट का फैसला](https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/lucknow-court-sentenced-lawyer-10-years-of-imprisonment-and-fine-tried-to-trap-opponent-lcla-rptc-2242496-2025-05-17)
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21##### 16 अप्रैल 2025
21##### 17 मई 2025
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23वक्फ कानून का विरोध कर रहे मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में तर्क दिया है कि ये कानून संविधान के मूल ढांचे पर हमला है और इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर देश को "ध्रुवीकृत" और "विभाजित" करना है. इनका कहना है कि नया वक्फ कानून मुस्लिम समुदाय की अपनी धार्मिक संपत्तियों पर दावा करने, बचाव करने या यहां तक कि उन्हें परिभाषित करने की क्षमता को समाप्त कर देता है.
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25## [मुर्शिदाबाद हिंसा: बंगाल में फिर उठी राष्ट्रपति शासन की मांग, जानें कितनी इजाजत देता है संविधान?](https://www.aajtak.in/india/news/story/president-rule-in-west-bengal-demand-murshidabad-violence-riots-waqf-amendment-act-mamata-banerjee-tmc-versus-bjp-ntcppl-dskc-2216149-2025-04-14)
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27##### 14 अप्रैल 2025
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29पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेन्दु अधिकारी ने कहा है कि बंगाल के पुलिस अधिकारी राज्य के पुलिस अधिकारी नहीं हैं बल्कि वे ममता बनर्जी के कैडर हैं. उन्होंने कहा कि बिना राष्ट्रपति शासन के बंगाल में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि जहां हिन्दू 50 प्रतिशत से कम हैं वहां ये लोग हिन्दुओं को वोट डालने नहीं देंगे. इसलिए चुनाव आयोग बंगाल में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करे.
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31## [वक्फ कानून के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट पहुंची महिला](https://www.aajtak.in/legal-news/story/wakf-law-parul-kheda-new-petition-supreme-court-delhi-lclar-rptc-2213417-2025-04-10)
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33##### 10 अप्रैल 2025
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35सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून को लेकर नोएडा निवासी पारुल खेड़ा ने नई याचिका दायर की है. इस याचिका में कानून को खत्म करने की बजाय इसे और सख्त बनाने की मांग की गई है. याचिका में गैर-मुस्लिम संपत्तियों की सुरक्षा, वक्फ बोर्ड के अधिकारों की समीक्षा और अन्य धार्मिक संस्थाओं को समान अधिकार देने की बात कही गई है.
23लखनऊ की विशेष एससी/एसटी कोर्ट ने एक वकील को 10 साल 6 महीने की सजा और दो लाख पचास हजार रुपये से अधिक जुर्माना लगाया है. वकील ने अपने विरोधियों को फंसाने के लिए झूठे केस दर्ज कराए थे. वकील लाखन सिंह ने अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए 20 से अधिक झूठे केस दर्ज करवाकर कोर्ट का समय बर्बाद कराया. जांच में यह केस पूरी तरह फर्जी पाया गया.